एकदिवसीय संगोष्ठी (हिन्दी)

श्याम लाल कॉलेज (सांध्य) के हिन्दी विभाग और आई क्यू ए सी के संयुक्त तत्वाधान में एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन 17 अगस्त 2017, दोपहर 1 बजे से कम्प्यूटर लेब में किया गया. जिसमें हिन्दी विभाग के डॉ. अनिल राय, डॉ. अर्चना उपाध्याय, डॉ. रेनू गुप्ता, डॉ. सुनीता खुराना, डॉ.प्रमोद द्विवेदी , डॉ. रीनू गुप्ता (शिक्षक प्रभारी ), डॉ. सरिता, डॉ. दीपिका वर्मा, डॉ.सुनीता सक्सेना, डॉ.अमित सिंह,   डॉ.रामरूप मीना, सुश्री अंजू बाला, और धर्मा रावत जी आदि विभाग के प्राध्यापकों के साथ कॉलेज के हिंदी विभाग के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया. अन्य महाविद्यालयों के शिक्षकों और कॉलेज के हिन्दी विभाग के पूर्व छात्र-छात्राओं जिसमें कि कुछ दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी और मीडिया के विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं, उन्होंने भी संगोष्ठी में प्रतिभागिता की.

संगोष्ठी का विषय था- वैश्विक संदर्भों में समाचार का बदलता स्वरूप

संगोष्ठी दो सत्रों में विभाजित थी-

प्रथम सत्र : (1:00- 4:00 बजे)

वक्तव्य  :  समाचार सम्पादन और उसका बदलता कल

          (प्रिंट मीडिया के संदर्भ में)

प्रमुख वक्ता : अनुराग अन्वेषी

           (वरिष्ठ सहायक समाचार संपादक, जनसत्ता)

 

द्वितीय सत्र : ( 4:30- 7:30 बजे)

वक्तव्य  :  न्यूज़ मेकिंग

          (इलेक्ट्रानिक मीडिया के संदर्भ में)

प्रमुख वक्ता : भारत भूषण

           (एसोसिएट समाचार संपादक, एनडीटीवी, दिल्ली)

कार्यक्रम का विधिवत आरंभ दोनों अतिथिगणों के साथ दीप प्रज्वलन से हुआ. अतिथियों के स्वागत कथन के उपरान्त उनके जीवनवृत व बहुमुखी प्रतिभा के प्रमुख पहलुओं को विद्यार्थियों के समक्ष उजागर किया गया. संगोष्ठी का प्रथम सत्र अनुराग अन्वेषी के वक्तव्य से आरंभ हुआ जिसमें उन्होंने अपने पांच से अधिक समाचार पत्रों के कार्यानुभावों को सांझा करते हुए समाचार सम्पादन और उसके बदलते कलेवर पर विस्तार के साथ रोचकता से प्रकाश डाला. उन्होंने अपने वक्तव्य के केंद्र में समाचार की बदलती भाषा और शैली को रखा. इसी क्रम में वर्तनी में आएं परिवर्तन , बनती या बिगडती वाक्य योजना और शब्दों के परिष्कार को अनेक उदाहरणों द्वारा बोर्ड पर अंकित किया. समाचार पत्रों में स्केच और कार्टून कोने का क्या महत्त्व है इस विषय पर भी अपने विचार स्केच बनाकर विद्यार्थियों के सामने रखे. उनके वक्तव्य के प्रमुख बिन्दुओं को इस प्रकार रेखाकिंत किया जा सकता है:

– समाचार के लेखन में सजीव भाषा की अनिवार्यता पर बल

– स्केच और कार्टून की रचना और रोचकता

– समाचार सम्पादन में सजगता और सतर्कता का महत्त्व

 

अनुराग अन्वेषी के वक्तव्य के उपरान्त निम्न शोध पत्रों का वाचन किया गया-  

‘वैश्विक संदर्भों में समाचार का बदलता स्वरूप’, विषय पर कॉलेज के हिंदी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. रेनू गुप्ता ने अपना आलेख प्रस्तुत किया. इसी क्रम में हिंदी विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. अर्चना उपाध्याय ने ‘ भूमंडलीय परिप्रेक्ष्य में संचार माध्यमों की हिन्दी’ विषय पर अपना शोध आलेख प्रस्तुत किया. प्रथम सत्र के अंत में विद्यार्थियों व अन्य गणमान्य श्रोताओं से प्रश्न आमंत्रित किए गएऔर अनेक जिज्ञासाओं का अपेक्षित हल प्रस्तुत करने का प्रयास वक्ताओं द्वारा किया गया.

द्वितीय सत्र के गणमान्य अतिथि एनडीटीवी दिल्ली में सहायक समाचार सम्पादक के पद पर नियुक्त भारतभूषण थे, जिनका इलेक्ट्रानिक मीडिया का कार्यानुभव एक दशक से अधिक का था. उनके वक्तव्य का विषय ‘न्यूज मेकिंग’ था, जिसमें इलेक्ट्रानिक मीडिया के भीतर समाचार गठन के सभी पहलुओं पर चर्चा की गई. भारत भूषण जी ने पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन और विविध लिंक्स के माध्यम से चैनलों के भीतर समाचार निर्माण, प्रसारण और सम्पादन की प्रक्रिया को श्रोताओं के समक्ष रखा. उनके व्याख्यान के प्रमुख बिंदु थे-

  • समाचार डेस्क बनावट व कार्यशैली
  • कैमरे का प्रयोग और घटना स्थल से होने वाली रिपोर्टिंग की उपलब्धि व जोखिम
  • चैनल में समाचार स्टूडियो की बनावट
  • सूचना को हथियाने के संघर्ष में बढ़ती-बनती आपसी चैनली प्रतिस्पर्धा

इस सत्र में तीन शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनकी संक्षिप्त रूपरेखा इस प्रकार है- 

पहला शोध पत्र कॉलेज के हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुनीता सक्सेना का था ,जिसका विषय था- सोशल मीडिया : आभासी दुनिया का यथार्थ, इसके साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से आएं शोधार्थी अभिषेक शुक्ला ने मीडिया, सोशल मीडिया और तनाव विषय पर अपना आलेख प्रस्तुत किया.हिन्दी विभाग की शिक्षक प्रभारी डॉ. रीनू गुप्ता ने ‘समाचार की भाषा : शक्ति और सीमाएं’ (इलेक्ट्रानिक माध्यम –टेलीविजन के संदर्भ में) विषय पर अपना वक्तव्य दिया.

द्वितीय सत्र के अंत में प्रश्न आमंत्रित किए गए और अनेक जिज्ञासाओं व धारणाओं ने इस संगोष्ठी के उद्देश्य को पूरा करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया जिसमें समाचार सम्पादन और बदलती भाषा के प्रमुख व्यावहारिक पहलुओं को जानना-समझना प्रमुख था.

संगोष्ठी का समापन शिक्षक प्रभारी के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ जिसमें आमंत्रित गणमान्य अतिथियों, विभिन्न विश्वविद्यालयों से आएं हुए शोधार्थियों, प्राध्यापकों, प्राचार्य महोदय और विद्यार्थियों को सफल आयोजन का श्रेय देते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया गया.